Thursday, 8 November 2012

कुछ  और ज़ुल्म करे ज़माना तो  मुकम्मल  करदू
बस एक  उन्वान  की ज़रूरत  हे मेरे  अफसाने को

जाने  क्यों   कहते हे लोग मुझे  बड़ा  जहा  शनास
रस्म-ऐ-दुनिया का मगर शऊर नहीं मुझ दीवाने को

   ***(( अय्यूब खान "बिस्मिल" ))**

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