कुछ और ज़ुल्म करे ज़माना तो मुकम्मल करदू
बस एक उन्वान की ज़रूरत हे मेरे अफसाने को
जाने क्यों कहते हे लोग मुझे बड़ा जहा शनास
रस्म-ऐ-दुनिया का मगर शऊर नहीं मुझ दीवाने को
***(( अय्यूब खान "बिस्मिल" ))**
बस एक उन्वान की ज़रूरत हे मेरे अफसाने को
जाने क्यों कहते हे लोग मुझे बड़ा जहा शनास
रस्म-ऐ-दुनिया का मगर शऊर नहीं मुझ दीवाने को
***(( अय्यूब खान "बिस्मिल" ))**